सूरह 94

Ash-Sharh الشرح

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आयत 1में से 8 · Mahmoud Khalil Al-Husary

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Ash-Sharh

अरबी पाठ: उथ्मानी लिपि (Tanzil-verified), Al Quran Cloud के माध्यम से।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

  1. जुज़ 30 · पृष्ठ 596

    أَلَمْ نَشْرَحْ لَكَ صَدْرَكَ ﴿١

    Alam nashrah laka sadrak

    (ऐ रसूल) क्या हमने तुम्हारा सीना इल्म से कुशादा नहीं कर दिया (जरूर किया)

  2. जुज़ 30 · पृष्ठ 596

    وَوَضَعْنَا عَنكَ وِزْرَكَ ﴿٢

    Wa wa d'ana 'anka wizrak

    और तुम पर से वह बोझ उतार दिया

  3. जुज़ 30 · पृष्ठ 596

    ٱلَّذِىٓ أَنقَضَ ظَهْرَكَ ﴿٣

    Allazee anqada zahrak

    जिसने तुम्हारी कमर तोड़ रखी थी

  4. जुज़ 30 · पृष्ठ 596

    وَرَفَعْنَا لَكَ ذِكْرَكَ ﴿٤

    Wa raf 'ana laka zikrak

    और तुम्हारा ज़िक्र भी बुलन्द कर दिया

  5. जुज़ 30 · पृष्ठ 596

    فَإِنَّ مَعَ ٱلْعُسْرِ يُسْرًا ﴿٥

    Fa inna ma'al usri yusra

    तो (हाँ) पस बेशक दुशवारी के साथ ही आसानी है

  6. जुज़ 30 · पृष्ठ 596

    إِنَّ مَعَ ٱلْعُسْرِ يُسْرًۭا ﴿٦

    Inna ma'al 'usri yusra

    यक़ीनन दुश्वारी के साथ आसानी है

  7. जुज़ 30 · पृष्ठ 596

    فَإِذَا فَرَغْتَ فَٱنصَبْ ﴿٧

    Fa iza faragh ta fansab

    तो जब तुम फारिग़ हो जाओ तो मुक़र्रर कर दो

  8. जुज़ 30 · पृष्ठ 596

    وَإِلَىٰ رَبِّكَ فَٱرْغَب ﴿٨

    Wa ilaa rabbika far ghab

    और फिर अपने परवरदिगार की तरफ रग़बत करो