सूरह 93

Ad-Duhaa الضحى

الضحىमक्की11 आयतें
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आयत 1में से 11 · Mahmoud Khalil Al-Husary
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Ad-Duhaa

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بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

  1. जुज़ 30 · पृष्ठ 596

    وَٱلضُّحَىٰ ﴿١﴾

    Wad duhaa

    (ऐ रसूल) पहर दिन चढ़े की क़सम

  2. जुज़ 30 · पृष्ठ 596

    وَٱلَّيْلِ إِذَا سَجَىٰ ﴿٢﴾

    Wal laili iza sajaa

    और रात की जब (चीज़ों को) छुपा ले

  3. जुज़ 30 · पृष्ठ 596

    مَا وَدَّعَكَ رَبُّكَ وَمَا قَلَىٰ ﴿٣﴾

    Ma wad da'aka rabbuka wa ma qalaa

    कि तुम्हारा परवरदिगार न तुमको छोड़ बैठा और (न तुमसे) नाराज़ हुआ

  4. जुज़ 30 · पृष्ठ 596

    وَلَلْءَاخِرَةُ خَيْرٌۭ لَّكَ مِنَ ٱلْأُولَىٰ ﴿٤﴾

    Walal-aakhiratu khairul laka minal-oola

    और तुम्हारे वास्ते आख़ेरत दुनिया से यक़ीनी कहीं बेहतर है

  5. जुज़ 30 · पृष्ठ 596

    وَلَسَوْفَ يُعْطِيكَ رَبُّكَ فَتَرْضَىٰٓ ﴿٥﴾

    Wa la sawfa y'uteeka rabbuka fatarda

    और तुम्हारा परवरदिगार अनक़रीब इस क़दर अता करेगा कि तुम ख़ुश हो जाओ

  6. जुज़ 30 · पृष्ठ 596

    أَلَمْ يَجِدْكَ يَتِيمًۭا فَـَٔاوَىٰ ﴿٦﴾

    Alam ya jidka yateeman fa aawaa

    क्या उसने तुम्हें यतीम पाकर (अबू तालिब की) पनाह न दी (ज़रूर दी)

  7. जुज़ 30 · पृष्ठ 596

    وَوَجَدَكَ ضَآلًّۭا فَهَدَىٰ ﴿٧﴾

    Wa wa jadaka daal lan fahada

    और तुमको एहकाम से नावाकिफ़ देखा तो मंज़िले मक़सूद तक पहुँचा दिया

  8. जुज़ 30 · पृष्ठ 596

    وَوَجَدَكَ عَآئِلًۭا فَأَغْنَىٰ ﴿٨﴾

    Wa wa jadaka 'aa-ilan fa aghnaa

    और तुमको तंगदस्त देखकर ग़नी कर दिया

  9. जुज़ 30 · पृष्ठ 596

    فَأَمَّا ٱلْيَتِيمَ فَلَا تَقْهَرْ ﴿٩﴾

    Fa am mal yateema fala taqhar

    तो तुम भी यतीम पर सितम न करना

  10. जुज़ 30 · पृष्ठ 596

    وَأَمَّا ٱلسَّآئِلَ فَلَا تَنْهَرْ ﴿١٠﴾

    Wa am mas saa-ila fala tanhar

    माँगने वाले को झिड़की न देना

  11. जुज़ 30 · पृष्ठ 596

    وَأَمَّا بِنِعْمَةِ رَبِّكَ فَحَدِّثْ ﴿١١﴾

    Wa amma bi ni'mati rabbika fahad dith

    और अपने परवरदिगार की नेअमतों का ज़िक्र करते रहना