सूरह 110

An-Nasr النصر

النصرमदनी3 आयतें
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आयत 1में से 3 · Mahmoud Khalil Al-Husary

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An-Nasr

अरबी पाठ: उथ्मानी लिपि (Tanzil-verified), Al Quran Cloud के माध्यम से।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

  1. जुज़ 30 · पृष्ठ 603

    إِذَا جَآءَ نَصْرُ ٱللَّهِ وَٱلْفَتْحُ ﴿١

    Iza jaa-a nas rullahi walfath

    ऐ रसूल जब ख़ुदा की मदद आ पहँचेगी

  2. जुज़ 30 · पृष्ठ 603

    وَرَأَيْتَ ٱلنَّاسَ يَدْخُلُونَ فِى دِينِ ٱللَّهِ أَفْوَاجًۭا ﴿٢

    Wa ra-aitan naasa yadkhuloona fee deenil laahi afwajah

    और फतेह (मक्का) हो जाएगी और तुम लोगों को देखोगे कि गोल के गोल ख़ुदा के दीन में दाख़िल हो रहे हैं

  3. जुज़ 30 · पृष्ठ 603

    فَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ وَٱسْتَغْفِرْهُ ۚ إِنَّهُۥ كَانَ تَوَّابًۢا ﴿٣

    Fa sab bih bihamdi rabbika was taghfir, innahu kaana tawwaaba

    तो तुम अपने परवरदिगार की तारीफ़ के साथ तसबीह करना और उसी से मग़फेरत की दुआ माँगना वह बेशक बड़ा माफ़ करने वाला है