सूरह 111

Al-Masad المسد

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आयत 1में से 5 · Mahmoud Khalil Al-Husary
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Al-Masad

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بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

  1. जुज़ 30 · पृष्ठ 603

    تَبَّتْ يَدَآ أَبِى لَهَبٍۢ وَتَبَّ ﴿١﴾

    Tab bat yadaa abee Lahabinw-wa tabb

    अबु लहब के हाथ टूट जाएँ और वह ख़ुद सत्यानास हो जाए

  2. जुज़ 30 · पृष्ठ 603

    مَآ أَغْنَىٰ عَنْهُ مَالُهُۥ وَمَا كَسَبَ ﴿٢﴾

    Maa aghna 'anhu maaluhu wa ma kasab

    (आख़िर) न उसका माल ही उसके हाथ आया और (न) उसने कमाया

  3. जुज़ 30 · पृष्ठ 603

    سَيَصْلَىٰ نَارًۭا ذَاتَ لَهَبٍۢ ﴿٣﴾

    Sa yas laa naran zaata lahab

    वह बहुत भड़कती हुई आग में दाख़िल होगा

  4. जुज़ 30 · पृष्ठ 603

    وَٱمْرَأَتُهُۥ حَمَّالَةَ ٱلْحَطَبِ ﴿٤﴾

    Wam ra-atuh hamma latal-hatab

    और उसकी जोरू भी जो सर पर ईंधन उठाए फिरती है

  5. जुज़ 30 · पृष्ठ 603

    فِى جِيدِهَا حَبْلٌۭ مِّن مَّسَدٍۭ ﴿٥﴾

    Fee jeediha hab lum mim-masad

    और उसके गले में बटी हुई रस्सी बँधी है