सूरह 109

Al-Kafirun الكافرون

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आयत 1में से 6 · Mahmoud Khalil Al-Husary

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Al-Kafirun

अरबी पाठ: उथ्मानी लिपि (Tanzil-verified), Al Quran Cloud के माध्यम से।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

  1. जुज़ 30 · पृष्ठ 603

    قُلْ يَٰٓأَيُّهَا ٱلْكَٰفِرُونَ ﴿١

    Qul yaa-ai yuhal kaafiroon

    (ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ काफिरों

  2. जुज़ 30 · पृष्ठ 603

    لَآ أَعْبُدُ مَا تَعْبُدُونَ ﴿٢

    Laa a'budu ma t'abudoon

    तुम जिन चीज़ों को पूजते हो, मैं उनको नहीं पूजता

  3. जुज़ 30 · पृष्ठ 603

    وَلَآ أَنتُمْ عَٰبِدُونَ مَآ أَعْبُدُ ﴿٣

    Wa laa antum 'aabidoona maa a'bud

    और जिस (ख़ुदा) की मैं इबादत करता हूँ उसकी तुम इबादत नहीं करते

  4. जुज़ 30 · पृष्ठ 603

    وَلَآ أَنَا۠ عَابِدٌۭ مَّا عَبَدتُّمْ ﴿٤

    Wa laa ana 'abidum maa 'abattum

    और जिन्हें तुम पूजते हो मैं उनका पूजने वाला नहीं

  5. जुज़ 30 · पृष्ठ 603

    وَلَآ أَنتُمْ عَٰبِدُونَ مَآ أَعْبُدُ ﴿٥

    Wa laa antum 'aabidoona ma a'bud

    और जिसकी मैं इबादत करता हूँ उसकी तुम इबादत करने वाले नहीं

  6. जुज़ 30 · पृष्ठ 603

    لَكُمْ دِينُكُمْ وَلِىَ دِينِ ﴿٦

    Lakum deenukum wa liya deen.

    तुम्हारे लिए तुम्हारा दीन मेरे लिए मेरा दीन