हिफ़्ज़ प्लेयर
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بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
- जुज़ 30 · पृष्ठ 603
قُلْ يَٰٓأَيُّهَا ٱلْكَٰفِرُونَ ﴿١﴾
Qul yaa-ai yuhal kaafiroon
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ काफिरों
- जुज़ 30 · पृष्ठ 603
لَآ أَعْبُدُ مَا تَعْبُدُونَ ﴿٢﴾
Laa a'budu ma t'abudoon
तुम जिन चीज़ों को पूजते हो, मैं उनको नहीं पूजता
- जुज़ 30 · पृष्ठ 603
وَلَآ أَنتُمْ عَٰبِدُونَ مَآ أَعْبُدُ ﴿٣﴾
Wa laa antum 'aabidoona maa a'bud
और जिस (ख़ुदा) की मैं इबादत करता हूँ उसकी तुम इबादत नहीं करते
- जुज़ 30 · पृष्ठ 603
وَلَآ أَنَا۠ عَابِدٌۭ مَّا عَبَدتُّمْ ﴿٤﴾
Wa laa ana 'abidum maa 'abattum
और जिन्हें तुम पूजते हो मैं उनका पूजने वाला नहीं
- जुज़ 30 · पृष्ठ 603
وَلَآ أَنتُمْ عَٰبِدُونَ مَآ أَعْبُدُ ﴿٥﴾
Wa laa antum 'aabidoona ma a'bud
और जिसकी मैं इबादत करता हूँ उसकी तुम इबादत करने वाले नहीं
- जुज़ 30 · पृष्ठ 603
لَكُمْ دِينُكُمْ وَلِىَ دِينِ ﴿٦﴾
Lakum deenukum wa liya deen.
तुम्हारे लिए तुम्हारा दीन मेरे लिए मेरा दीन