सूरह 91

Ash-Shams الشمس

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आयत 1में से 15 · Mahmoud Khalil Al-Husary

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Ash-Shams

अरबी पाठ: उथ्मानी लिपि (Tanzil-verified), Al Quran Cloud के माध्यम से।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

  1. जुज़ 30 · पृष्ठ 595

    وَٱلشَّمْسِ وَضُحَىٰهَا ﴿١

    Wash shamsi wa duhaa haa

    सूरज की क़सम और उसकी रौशनी की

  2. जुज़ 30 · पृष्ठ 595

    وَٱلْقَمَرِ إِذَا تَلَىٰهَا ﴿٢

    Wal qamari izaa talaa haa

    और चाँद की जब उसके पीछे निकले

  3. जुज़ 30 · पृष्ठ 595

    وَٱلنَّهَارِ إِذَا جَلَّىٰهَا ﴿٣

    Wannahaari izaa jallaa haa

    और दिन की जब उसे चमका दे

  4. जुज़ 30 · पृष्ठ 595

    وَٱلَّيْلِ إِذَا يَغْشَىٰهَا ﴿٤

    Wallaili izaa yaghshaa haa

    और रात की जब उसे ढाँक ले

  5. जुज़ 30 · पृष्ठ 595

    وَٱلسَّمَآءِ وَمَا بَنَىٰهَا ﴿٥

    Wassamaaa'i wa maa banaahaa

    और आसमान की और जिसने उसे बनाया

  6. जुज़ 30 · पृष्ठ 595

    وَٱلْأَرْضِ وَمَا طَحَىٰهَا ﴿٦

    Wal ardi wa maa tahaahaa

    और ज़मीन की जिसने उसे बिछाया

  7. जुज़ 30 · पृष्ठ 595

    وَنَفْسٍۢ وَمَا سَوَّىٰهَا ﴿٧

    Wa nafsinw wa maa sawwaahaa

    और जान की और जिसने उसे दुरूस्त किया

  8. जुज़ 30 · पृष्ठ 595

    فَأَلْهَمَهَا فُجُورَهَا وَتَقْوَىٰهَا ﴿٨

    Fa-alhamahaa fujoorahaa wa taqwaahaa

    फिर उसकी बदकारी और परहेज़गारी को उसे समझा दिया

  9. जुज़ 30 · पृष्ठ 595

    قَدْ أَفْلَحَ مَن زَكَّىٰهَا ﴿٩

    Qad aflaha man zakkaahaa

    (क़सम है) जिसने उस (जान) को (गनाह से) पाक रखा वह तो कामयाब हुआ

  10. जुज़ 30 · पृष्ठ 595

    وَقَدْ خَابَ مَن دَسَّىٰهَا ﴿١٠

    Wa qad khaaba man dassaahaa

    और जिसने उसे (गुनाह करके) दबा दिया वह नामुराद रहा

  11. जुज़ 30 · पृष्ठ 595

    كَذَّبَتْ ثَمُودُ بِطَغْوَىٰهَآ ﴿١١

    Kazzabat Samoodu bi taghwaahaaa

    क़ौम मसूद ने अपनी सरकशी से (सालेह पैग़म्बर को) झुठलाया,

  12. जुज़ 30 · पृष्ठ 595

    إِذِ ٱنۢبَعَثَ أَشْقَىٰهَا ﴿١٢

    Izim ba'asa ashqaahaa

    जब उनमें का एक बड़ा बदबख्त उठ खड़ा हुआ

  13. जुज़ 30 · पृष्ठ 595

    فَقَالَ لَهُمْ رَسُولُ ٱللَّهِ نَاقَةَ ٱللَّهِ وَسُقْيَٰهَا ﴿١٣

    Faqaala lahum Rasoolul laahi naaqatal laahi wa suqiyaahaa

    तो ख़ुदा के रसूल (सालेह) ने उनसे कहा कि ख़ुदा की ऊँटनी और उसके पानी पीने से तअर्रुज़ न करना

  14. जुज़ 30 · पृष्ठ 595

    فَكَذَّبُوهُ فَعَقَرُوهَا فَدَمْدَمَ عَلَيْهِمْ رَبُّهُم بِذَنۢبِهِمْ فَسَوَّىٰهَا ﴿١٤

    Fakazzaboohu fa'aqaroohaa fadamdama 'alaihim Rabbuhum bizambihim fasaw waahaa

    मगर उन लोगों पैग़म्बर को झुठलाया और उसकी कूँचे काट डाली तो ख़ुदा ने उनके गुनाहों सबब से उन पर अज़ाब नाज़िल किया फिर (हलाक करके) बराबर कर दिया

  15. जुज़ 30 · पृष्ठ 595

    وَلَا يَخَافُ عُقْبَٰهَا ﴿١٥

    Wa laa yakhaafu'uqbaahaa

    और उसको उनके बदले का कोई ख़ौफ तो है नहीं