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आयत 1में से 5 · Mahmoud Khalil Al-Husary
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✓ अरबी पाठ: उथ्मानी लिपि (Tanzil-verified), Al Quran Cloud के माध्यम से।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
- जुज़ 30 · पृष्ठ 604
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلْفَلَقِ ﴿١﴾
Qul a'uzoo bi rabbil-falaq
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं सुबह के मालिक की
- जुज़ 30 · पृष्ठ 604
مِن شَرِّ مَا خَلَقَ ﴿٢﴾
Min sharri ma khalaq
हर चीज़ की बुराई से जो उसने पैदा की पनाह माँगता हूँ
- जुज़ 30 · पृष्ठ 604
وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ ﴿٣﴾
Wa min sharri ghasiqin iza waqab
और अंधेरीरात की बुराई से जब उसका अंधेरा छा जाए
- जुज़ 30 · पृष्ठ 604
وَمِن شَرِّ ٱلنَّفَّٰثَٰتِ فِى ٱلْعُقَدِ ﴿٤﴾
Wa min sharrin-naffaa-thaati fil 'uqad
और गन्डों पर फूँकने वालियों की बुराई से
- जुज़ 30 · पृष्ठ 604
وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ ﴿٥﴾
Wa min shar ri haasidin iza hasad
(जब फूँके) और हसद करने वाले की बुराई से