सज्दा-ए-तिलावत: तिलावत का सज्दा
प्रामाणिक हदीसें सज्दा-ए-तिलावत को स्थापित करती हैं।
दलील और मार्गदर्शन
प्रामाणिक हदीसें सज्दा-ए-तिलावत को स्थापित करती हैं। अबू हुरैरह رضي الله عنه ने कहा कि उन्होंने सज्दे की आयत पढ़े जाने पर नबी ﷺ के पीछे सज्दा किया, जबकि उमर رضي الله عنه ने सार्वजनिक रूप से दिखाया कि हर बार यह सज्दा अनिवार्य नहीं।
इसे कैसे अपनाएँ
सुन्नी फुक़हा इसकी वैधता पर सहमत हैं, लेकिन कुछ विवरणों, शर्तों और सज्दों की संख्या में मतभेद रखते हैं। मान्य फ़िक़्ही मतभेद को मिटाएँ नहीं। व्यावहारिक विवरणों में किसी विश्वसनीय सुन्नी मदहब या विद्वान का अनुसरण करें।